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भारत में कुछ अजीबो गरीबो कानून क्या हैं ?

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 ‘National Law Day’ . ये भारत में हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है. 

1. The Aircraft Act 1934 के अनुसार बिना पुलिस की प्रमिशन लिये गुब्बारें और पतंग उड़ाना गैरकानूनी है।

2. Indian Sarais Act 1867 के अनुसार आप किसी भी होटल में फ्री में पानी और बाथरूम यूज करने के लिए पूछ सकते है, चाहें वह होटल 7 Star ही क्यों न हो।

3. केरल में तीसरा बच्चा पैदा करने पर 10,000 रूपये का जुर्माना लगता है।

4. The Land Acquisition Act, 1894 के तहत सरकार आपकी जमीन को किसी भी समय खरीद सकती है. आपके ना चाहते हुए भी।

5. सूर्य छिपने के बाद और सुबह सूर्य निकलने से पहले पुलिस महिला को गिरफ्तार नही कर सकती. बहुत ही serious case में अगर गिफ्तार करना ही है तो मजिस्ट्रेट से लिखित में प्रमिशन लेनी होगी।

6. यदि आपके वाहन का दिन में एक बार किसी चीज के लिए चालान हो जाता है तो उसका पूरे दिन दोबारा चालान नही होगा। e.g: अगर आप पर दिन में एक बार हेलमेट ना पहनने का चालान हो गया है तो रात तक आप बिना हेलमेट पहने घूम सकते है।

7. 2011 में Ministry of Women and Child Development ने ये कानून बनाया कि एक अकेला आदमी किसी लड़की को गोद नही ले सकता।

8. Hindu Adoption and Maintenance Act, 1956 के अनुसार किसी विवाहित हिंदू जोड़े के पास यदि पहले से लड़का है तो वह लड़का गोद नही ले सकता यही बात लड़की पर भी लागू होती है।

9. Indian Panel Code के section 309 के अनुसार, आत्महत्या करना कानूनी है लेकिन बच जाने पर 1 साल तक की जेल हो सकती है।

10. आंध्रप्रदेश में मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर बनने के लिए अच्छे दांत होने चाहिए

11. यदि आप पार्क वगैरह या सार्वजनिक जगह पर अश्लील हरकत करते है तो 3 महीने की जेल हो सकती है।

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10. निम्नलिखित अवतरण को पढ़े और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उतर दे :.....लगभग सभी नए सामाजिक आन्दोलन नयी समस्याओ जैसे-पर्यावरण का विनाश,महिलाओ की बदहाली आदिवासी संस्कृति का नाश और मानवाधिकारों का उल्लंघन .........के समाधान को रेखांकित करते हुए उभरे | इनमे से कोई भी अपनेआप में समाजव्यवस्था के मूलगामी बदलाव के सवाल से नही जुड़ा था | इस अर्थ में ये आन्दोलन अतीत की कान्तिकारी विचारधाराओ से एकदम अलग है | लेकिन ये आन्दोलन बड़ी बुरी तरह बिखरे हुए है और यही इनकी कमजोरी है ..... सामाजिक आन्दोलन का एक बड़ा  दायरा एसी चीजो की चपेट में है कि वह एक ठोस तथा एकजुट जन आन्दोलन का रूप नही ले पाता और न ही वचितो और गरीबो के लिय प्रासंगिक हो पाता है | ये आन्दोलन बिखरे-बिखरे है प्रतिक्रिया के तत्वों से भरे है अनियत हैं और बुनियादी  सामाजिक बदलाव के लिए इनके पास कोई फ्रेमवर्क नही है | इस या उस के विरोध (पश्चिम-

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