यह साइट खासकर के प्रैक्टिस के लिए है, इसलिए अधिकतर प्रश्नो के उत्तर नहीं दिए गए हैं| आप उत्तर देके मदद कर सकते हैं अपनी और दूसरों की भी

10. निम्नलिखित अवतरण को पढ़े और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उतर दे :.....लगभग सभी नए सामाजिक आन्दोलन नयी समस्याओ जैसे-पर्यावरण का विनाश,महिलाओ की बदहाली आदिवासी संस्कृति का नाश और मानवाधिकारों का उल्लंघन .........के समाधान को रेखांकित करते हुए उभरे | इनमे से कोई भी अपनेआप में समाजव्यवस्था के मूलगामी बदलाव के सवाल से नही जुड़ा था | इस अर्थ में ये आन्दोलन अतीत की कान्तिकारी विचारधाराओ से एकदम अलग है | लेकिन ये आन्दोलन बड़ी बुरी तरह बिखरे हुए है और यही इनकी कमजोरी है ..... सामाजिक आन्दोलन का एक बड़ा  दायरा एसी चीजो की चपेट में है कि वह एक ठोस तथा एकजुट जन आन्दोलन का रूप नही ले पाता और न ही वचितो और गरीबो के लिय प्रासंगिक हो पाता है | ये आन्दोलन बिखरे-बिखरे है प्रतिक्रिया के तत्वों से भरे है अनियत हैं और बुनियादी  सामाजिक बदलाव के लिए इनके पास कोई फ्रेमवर्क नही है | इस या उस के विरोध (पश्चिम-

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(क) क्रान्तिकारी विचारधाराएँ समाज व्यवस्था के मूलगामी बदलाव के साथ जुडी हुई होती हैं, जबकि नये सामाजिक आन्दोलन समाज व्यवस्था के मूलगामी बदलाव के साथ जुड़े हुए नहीं हैं |(ख) सामाजिक आन्दोलन बिखरे हुए हैं तथा उनमें एकजुटता का आभाव है | सामाजिक आन्दोलन के पास सामाजिक बदलाव के लिए कोई ढांचागत योजना नहीं है |(ग) सामाजिक आन्दोलन द्वारा उठाए गए विशिष्ट मुद्दों के कारण यह कहा जा सकता हैं की ये आन्दोलन अपने मुद्दे पर अधिक केन्द्रित हैं |

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10. नीचे लिखे अवतरण को पढिए और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उतर दीजीए -राष्ट्र-निर्माण के इतिहास के लिहाज से सिर्फ सोवियत संघ में हुए प्रयोगों की तुलना भारत से की हा सकती है | सोवियत संघ ने भी विभिन्न और परस्पर अलग-अलग जातीय समूह धर्म भाषाई समुदाय और सामाजिक वर्गो के बीच एकता का भाव कायम करना पड़ा | जिस पैमाने पर यह काम हुआ, चाहे भौगोलिक पैमाने के लिहाज से देखे या जनसख्या  वैविध्य के लिहाज से वह अपनाप में बहुत व्यापक कहा जाएगा | दोनों ही जगह राज्य को जिस कच्ची सामग्री से राष्ट्र-निर्माण की शुरूआत करनी थी वह समान रूप से दुष्कर थी | लोग धर्म के आधार पर बंटे हुए और कर्ज तथा बीमारी से दबे हुए थे|(क) यहाँ लिखक ने भारत और सोवियत संघ के बीच जिन समानताओ का उल्लेख किया है , उनकी एक सूची बनिए |इनमे से प्रत्येक के लिए भारत से एक उदहारण दीजीए |(ख) लेखक ने यहाँ भारत और सोवियत संघ में चली राष्ट्र-निर

1 answer asked May 11, 2019 in political-science by anonymous
10. निम्नलिखित अवतरण को पढ़कर इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उतर दीजिए :कांग्रेस के संगठनकर्ता पटेल कांग्रेस को दुसरे राजनीतिक समूह से निसंग रखकर उसे एक सर्वाग्स्मतथा अनुश्सित राजनीतिक पार्टी बनाना चाहते थे | वे चाहते थे कि कांग्रेस सबको समेटकर चलनेवाला स्वभाव छोड़े और अनुश्षित काडर से युक्त एक सगुफित पार्टी के रूप में उभरे | यथार्थवादीहोने के कारण पटेल व्यापकता की जगह अनुश्सन को ज्यादा तरजीह देते थे अगर ''आन्दोलन कोचलाते चले जाने के बारे में गांधी के ख्याल हद से ज्यादा रोमानी थे तो कांग्रेस को किसी एकविचारधारा पर चलने वाले अनुशासित तथा धुरंधर राजनीतिक पार्टी के रूप में बदले की पटेल कीधारणा भी तरह कांग्रेस की उस समन्वयवादी भूमिका को पकड़ पाने में चुक गई जिसे कांग्रेस कोआने वाले दशको में निभाना था | (क) लेखक क्यों सोच रहा है कि कांग्रेस को सर्वागसम तथा अनुशासित पार्टी नही होना चहिए ?(ख) शुरु

1 answer asked May 11, 2019 in political-science by anonymous
8. निम्नलिखित अवतरण को पढ़े और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उतर दें :भारत की दलगत राजनीति ने कई चुनौतियों का सामना किया हैं | कांग्रेस -प्रणाली ने अपना खात्मा ही नही किया बल्कि कांग्रेस के जमावड़े के बिखर जाने से आत्म -प्रतिनिधित्व की नयी प्रव्रीती का भी जोर बढ़ा | इससे दलगत व्यवस्था और विभिन्न हितों की समाई करने की इसकी क्षमता पर भी सवाल उठे | राजव्यवस्था के सामने एक महत्वपूर्ण काम एक ऐसी दलगत व्यवस्था खडी करने अथवा राजनीतिक दलों को गढने की है ,जो कारगर तरीके से विभिन्न हितों को मुखर और एकजुट करें ....(क) इस अध्याय को पढने के बाद क्या आप दलगत व्यवस्था की चुनौतियों की सूची बना सकते हैं?(ख) विभिन्न हितों का समाहार और उनमे एकजुटता का होना क्यों जरूरी है |(ग) इस अध्याय में आपने अयोध्या विवाद के बारे में पढ़ा | इस विवाद ने भारत के राजनीतिक दलों की समाहार की क्षमता के आगे क्या चुनौती पेश की ? 

1 answer asked May 11, 2019 in political-science by anonymous
10. निम्नलिखित अवतरण को पढ़े और इसके आधार पर [पूछे गए प्रश्नों के उतर दीजिए :गुटनिरपेक्षता का व्यापक अर्थ है अपने को किशी भी सैन्य गुट में शमिल नही करने ...इसका अर्थहोता है चीजो को यथासंभव सैन्य द्रिस्टीकोण से न देखना और इसकी कभी जरूरत आन पड़े तक भीकीसी सैन्य गुट के नजरिए को अपनाने की जगह स्वतंत्र रूप से विचार करना तथा सभी देशो केसाथ दोस्ताना रिश्ते कायम करना ........(क) नेहरू सैन्य गुटों से दूरी क्यों बनाना चाहता थे ?(ख) क्या आप मानते है कि भरत-सोवियत मैत्री की संधि से गुटनिरपेक्षता के सिदान्तो का उल्लंघनहुआ ? अपने उतर के समर्थन में तर्क दीजिए |(ग) अगर सैन्य - गुट न होता तो क्या गुटनिरपेक्षता की नीति बेमानी होती ?

1 answer asked May 11, 2019 in political-science by anonymous

किसी प्रकार का सैनिक आक्रमण।
सामूहिक प्राणदंड अथवा नर बलि।
मृतकों का अनियमित शवाधान।
मलेरिया या किसी अन्य रोगाणुजनित बीमारी से व्यापक मृत्यु या महामारी।
1 answer asked Feb 10, 2019 in History by anonymous
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