5. नीचे 1947के अगस्त के कुछ बयान दिए गए है जो अपनी प्रकृति अत्यंत भिन्न है : आज आपने अपने सर पर काँटों का ताज पहना है |सता का आसन एक बुरी चीज है इस आसन पर आपको बड़ा सचेत रहना होगा ... आपको और ज्यादा विन्रम और धैर्यवान बनाना होगा ... अब लगातार आपकी परीक्षा ली जाएगी |मोहनदास करमचंद गाँधीभारत आजादी की जिदगी के लिए जागेगा हम पुराने से नए की और कदम बढ़ेंगे ... आज दुर्भाग्य के एक दौर का खत्म होगा हिदुस्तान अपने को फिर से पा लेगा ... आज हम जो जश्न मना रहे है वह कदम भर है संभवनाओ के द्वारा खुल रहे है ...जवाहरलाल नेहरू इन दो बयानों से राष्ट्र-निर्माण का जो एजेडा ध्वनित होगा है उसे लिखिए | आपको कौन -सा एजेंडा जँच रहा है और क्यों ?

0 votes
43 views
asked in political-science by

1 Answer

answered by
मोहनदास करमचन्द गांधी एवं पं जवाहर लाल नेहरु दोनों के बयान राष्ट्र- निर्माण से सम्बंधित हैं, परन्तु प्रकृति में सर्वथा भिन्न हैं | जहां गाँधी जी ने देश के नये शासकों को यह कहकर आगाह किया हैं, कि भारत पर स्वमं शासन करना आसान नहीं होगा, क्योंकि भारत में कई प्रकार की समस्याएं हैं, जिन्हें हल करना होगा, वहीं पं नेहरु के बयान में भविष्य के राष्ट्र की कल्पना की गई है जिसमे उन्होंने वक ऐसे राष्ट्र की कल्पना की है, जो आत्म-निर्भर एवं स्वाभिमानी बनेगा | हम यह पर पं नेहरु के बयान से आधिक तौर पर सहमत हैं, क्योंकि उनके बयान में भविष्य के सम्रद्ध एवं शक्तिशाली राष्ट्र के दर्शन होते हैं |

Related questions

Made with in Patna
...