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मेरा माँझी मुझसे कहता रहता थाबिना बात तुम नहीं किसी से टकराना ।पर जो बार-बार बाधा बन के आए,उनके सिर को वहीं कुचल कर बढ़ जाना ।।जानबूझकर जो मेरे पथ में आती हैं,भवसागर की चलती-फिरती चट्टानें ।मैं इनसे जितना ही बचकर चलता हूँ,उतनी ही मिलती हैं, ये ग्रीवा ताने ।रख अपनी पतवार, कुदाली को लेकरतब मै इनका उन्नत भाल झुकाता हूँ।राह बनाकर नाव चढ़ाए जाताहूँ,जीवन की नैया का चतुर खिवैया मैंभवसागर में नाव बढ़ाए जाता हूँ ।(६) उन्नत भाल का क्या आशय है?​

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मेरा माँझी मुझसे कहता रहता था बिना बात तुम नहीं किसी से टकराना । पर जो बार-बार बाधा बन के आएँ, उनके सिर को वहीं कुचल कर बढ़ जाना । जानबूझ कर जो मेरे पथ में आती है, भवसागर की चलती-फिरती चट्टानें । मैं इनसे जितना ही बचकर चलता हूँ, उतनी ही मिलती हैं, ये ग्रीवा ताने । रख अपनी पतवार, कुदाली को लेकर तब मैं इनका उन्नत भाल झुकाता हूँ । राह बनाकर नाव चढ़ाए जाता हूँ, जीवन की नैया का चतुर खिवैया मैं भवसागर में नाव बढ़ाए जाता हूँ। (क) राह में आने वाली बाधाओं के साथ कवि कैसा व्यवहार करता है (ख) कवि ने हमें क्या प्रेरणा दी है ? स्पष्ट कीजिए । (ग) कवि ने अपना माँझी किसे कहा है ? (घ) उन्नत भाल' का क्या आशय है ? (ङ) जीवन की नैया का चतुर खिवैया' किसे कहा गया है।

0 answers asked May 13, 2019 by anonymous

आद्यकल्प की चट्टानें
धारवाड़ चट्टानें
कड़प्पा चट्टानें
गोण्डवाना चट्टानें
1 answer asked Feb 11, 2019 in छत्तीसगढ़ by anonymous
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