मेरा माँझी मुझसे कहता रहता था बिना बात तुम नहीं किसी से टकराना । पर जो बार-बार बाधा बन के आएँ, उनके सिर को वहीं कुचल कर बढ़ जाना । जानबूझ कर जो मेरे पथ में आती है, भवसागर की चलती-फिरती चट्टानें । मैं इनसे जितना ही बचकर चलता हूँ, उतनी ही मिलती हैं, ये ग्रीवा ताने । रख अपनी पतवार, कुदाली को लेकर तब मैं इनका उन्नत भाल झुकाता हूँ । राह बनाकर नाव चढ़ाए जाता हूँ, जीवन की नैया का चतुर खिवैया मैं भवसागर में नाव बढ़ाए जाता हूँ। (क) राह में आने वाली बाधाओं के साथ कवि कैसा व्यवहार करता है (ख) कवि ने हमें क्या प्रेरणा दी है ? स्पष्ट कीजिए । (ग) कवि ने अपना माँझी किसे कहा है ? (घ) उन्नत भाल' का क्या आशय है ? (ङ) जीवन की नैया का चतुर खिवैया' किसे कहा गया है।

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1 answer asked Feb 11, 2019 in छत्तीसगढ़ by anonymous
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