निम्नलिखित गद्याश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :भारत विशाल देश है । भौगोलिक दृष्टि से यहाँ संसार के सबसे ऊँचे पर्वत, बहुत ठंडेग्लेशियर, जगलो से ढके पहाड़, राजस्थान का उष्ण और लद्दाख का शीतल मरुस्थल, उपजाऊमैदान, दक्षिणी पठार, सदानीरा नदियाँ, सुंदर-सुहावने समुद्री किनारे, चेरापूंजी जैसे अत्यधिकवर्षा वाले स्थान आदि हैं। लोगों के भिन्न-भिन्न रंग-रूप, रीति-रिवाज़ हैं । हिंदू, जैन, बौद्ध,सिख, मुसलमान और पारसी आदि विविध धर्मों को मानने वाले यहाँ मिलकर रहते हैं जो एकदुर्लभ विशेषता है । जनसंख्या की दृष्टि से संसार का दूसरा बड़ा देश भारत ही हैं। यहअनेकता रूपी रंगों की इंद्रधनुषी एकता के सूत्र में बँधा हुआ देश है। विश्व इसकी अनेकता मेंएकता देखकर चकित हो जाता है। भारत के गाँवों में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दरिद्र, दुर्बलऔर रोगी नहीं हैं, जिनको किसी प्रकार का अभाव नहीं, पर ऐसे लोग

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प्र2.निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-हँस लो दो क्षण खुशी मिली गर,उगता-लता रहता सूरज,वरना जीवन-भर क्रंदन है।किसका साथी नील गगन है।किसका जीवन हँसी-खुशी में,यदि तुमको मुसकान मिली तोइस दुनिया में रहकर बीता ?मुसकाओ सबके संग जाकरसदा-सर्वदा संघर्षों को,यदि तुमको सामर्थ्य मिला तोइस दुनिया में किसने जीता ?थामो सबको हाथ बढ़ाकरखिलता फूल म्लान हो जाताझाँको अपने मन-दर्पण मेंहँसता-रोता चमन-चमन है।प्रतिबिंबित सबका आनन है।कितने रोज चमकते तारें।कितने रह-रह गिर जाते हैं ?हँसता शशि भी छिप जाता,जब सावन-घन घिर आते हैं।(क) कवि दो eण के लिए मिली खुशी पर हँसने के लिए क्यों कह रहा है ?(ख) कविता में संसार की किस वास्तविकता को प्रस्तुत किया गया है?(ग) व रपष्ट कीजिए. “को अपने मन दर्पण में प्रतिबिंबित सबका आनन है।"(घ) संघर्ष, साम ( का वर्ण-विछेद कीजिए)(च) काव्यांश के लिए उपयुत

0 answers asked May 27, 2019 by anonymous
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :पिता के ठीक विपरीत थीं हमारी बेपढ़ी-लिखी माँ । धरती से कुछ ज्यादा ही धैर्य औरसहनशक्ति थी शायद उनमें । पिता जी की हर ज्यादती को अपना प्राप्य और बच्चों की हरउचित-अनुचित फरमाइश और ज़िद को अपना फ़र्ज़ समझकर बड़े सहज भाव से स्वीकार करतीथीं वे । उन्होंने जिंदगी भर अपने लिए कुछ माँगा नहीं, चाहा नहीं... केवल दिया ही दिया ।हम भाई-बहिनों का सारा लगाव (शायद सहानुभूति से उपजा) माँ के साथ था लेकिन निहायतअसहाय मजबूरी में लिपटा उनका यह त्याग कभी मेरा आदर्श नहीं बन सका... न उनकात्याग, न उनकी सहिष्णुता ।(क) माँ की उपमा धरती से क्यों की गई है ?(ख) लेखिका को माँ का कौन-सा रूप अच्छा नहीं लगता था ? क्यों ?(ग) लेखिका और उसके भाई-बहिनों की सहानुभूति किसके साथ थी ?​

0 answers asked May 14, 2019 by anonymous
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों बहुत घुटन है बंद घरों में , खुली हवा तो आने दो , संशय की खिड़कियाँ खोल , किरनों को मुस्काने दो । ऊँचे - ऊँचे भवन उठ रहे , पर आँगन का नाम नहीं , चमक - दमक , आपा - धापी है , पर जीवन का नाम नहीं । लौट न जाए सूर्य द्वार से , नया संदेशा लाने दो । हर माँ अपना राम जोहती , कटता क्यों वनवास नहीं । मेहनत की सीता भी भूखी , रुकता क्यों उपवास नहीं । बाबा की सूनी आँखों में चुभता तिमिर भागने दो । हर उदास राखी गुहारती , भाई को वह प्यार कहाँ ? डरे - डरे रिश्ते भी कहते , अपनों का संसार कहाँ गुमसुम गलियों को मिलने दो , खुशबू तो बिखराने दो । q ansक ) गन का नाम नहीं - पंक्ति का आशय स्पष्ट ख ) ग ) घ ) ङ ) ऊँचे - ऊँचे भवन उठ रहे , पर आँगन का नाम नहीं - पक्ति का कीजिए । सूर्य द्वार से ही क्यों लौट जाएगा ? आज रिश्तों के डरे - डरे होने का कारण आप क्या मान

0 answers asked May 14, 2019 by anonymous
❤️❤️ Plz... 2. निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :बहुत घुटन है बंद घरों में, खुली हवा तो आने दो,संशय की खिड़कियाँ खोल, किरनों को मुस्काने दो।ऊँचे-ऊँचे भवन उठ रहे, पर आँगन का नाम नहीं, 91\चमक-दमक, आपा-धापी है, पर जीवन का नाम नहींलौट न जाए सूर्य द्वार से, नया संदेशा लाने दो ।।(2) के7शनहर माँ अपना राम जोहती, कटता क्यों वनवास नहींमेहनत की सीता भी भूखी, रुकता क्यों उपवास नहीं ।बाबा की सूनी आँखों में चुभता तिमिर भागने दो ।हर उदास राखी गुहारती, भाई का वह प्यार कहाँ ?डरे-डरे रिश्ते भी कहते, अपनों का संसार कहाँ ?गुमसुम गलियों को मिलने दो, खुशबू तो बिखराने दो।।3/2/3]​

0 answers asked May 14, 2019 by anonymous
Plz ❤️❤️❤️निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :बहुत घुटन है बंद घरों में, खुली हवा तो आने दो,संशय की खिड़कियाँ खोल, किरनों को मुस्काने दो ।ऊँचे-ऊँचे भवन उठ रहे, पर आँगन का नाम नहीं,चमक-दमक, आपा-धापी है, पर जीवन का नाम नहींलौट न जाए सूर्य द्वार से, नया संदेशा लाने दो ।) के17शनहर माँ अपना राम जोहती, कटता क्यों वनवास नहींमेहनत की सीता भी भूखी, रुकता क्यों उपवास नहीं ।बाबा की सूनी आँखों में चुभता तिमिर भागने दो ।हर उदास राखी गुहारती, भाई का वह प्यार कहाँ ?डरे-डरे रिश्ते भी कहते, अपनों का संसार कहाँ ?गुमसुम गलियों को मिलने दो, खुशबू तो बिखराने दो।3/2/3​

0 answers asked May 13, 2019 by anonymous

बिल्कुल नहीं है
नहीं के बराबर है
बहुतायत में होता है
उक्त में से कोई नहीं
1 answer asked Feb 11, 2019 in राजस्थान by anonymous
Made with in Patna
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